फलित ज्योतिष के तीन स्तम्भ वैदिक फलित ज्योतिष की एक विशिष्ट पुस्तक है, जिसमें जीवन के तीन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय—मुहूर्त (Auspicious Timing), विवाह (Marriage) और संतान (Children)—का गहन एवं व्यावहारिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। लेखक एल. सी. शर्मा ने इस ग्रंथ में पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ सरल भाषा में समझाया है, जिससे विद्यार्थी एवं अनुभवी ज्योतिषी दोनों समान रूप से लाभान्वित हो सकते हैं।
पुस्तक का प्रथम भाग मुहूर्त शास्त्र पर आधारित है, जिसमें विभिन्न शुभ कार्यों के लिए उचित समय चयन की पारंपरिक एवं व्यावहारिक विधियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें विवाह, गृह प्रवेश, शिक्षा, यात्रा, व्यवसाय एवं अन्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त मुहूर्त निर्धारित करने के नियमों को सरल रूप में समझाया गया है। लेखक ने आधुनिक जीवन में मुहूर्त की उपयोगिता तथा अष्टकवर्ग की सहायता से मुहूर्त चयन की विशेष विधियों का भी वर्णन किया है।
दूसरे भाग में विवाह ज्योतिष का विस्तृत अध्ययन दिया गया है। इसमें विवाह के समय का निर्धारण, विवाह योग, विवाह में विलंब, बहुविवाह योग, वैधव्य योग, विधुर योग, कुमार योग, वैवाहिक सुख-दुःख, पति-पत्नी संबंध, वैवाहिक बाधाएँ तथा वैवाहिक जीवन से जुड़े अनेक ज्योतिषीय सिद्धांतों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। विवाह संबंधी निर्णयों में पाराशरी एवं अष्टकवर्ग दोनों पद्धतियों का उपयोग समझाया गया है।
तीसरे भाग में संतान ज्योतिष का अत्यंत विस्तृत विवेचन किया गया है। इसमें संतान प्राप्ति के योग, संतान में विलंब, निःसंतान योग, गर्भपात के ज्योतिषीय कारण, पुत्र एवं पुत्री जन्म के संकेत, संतान क्षति, पिता-पुत्र संबंध तथा पूर्व जन्म के पुण्यों का संतान सुख पर प्रभाव जैसे विषयों का गहन विश्लेषण किया गया है। पुस्तक में इन सभी सिद्धांतों को परीक्षित जन्मकुंडलियों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है, जिससे पाठक व्यावहारिक भविष्यवाणी करना सीख सकता है।
यह पुस्तक विशेष रूप से उन विद्यार्थियों एवं ज्योतिषाचार्यों के लिए उपयोगी है जो केवल सिद्धांत ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की घटनाओं पर आधारित फलित ज्योतिष को समझना चाहते हैं। लेखक ने पाराशरी, जैमिनी एवं अष्टकवर्ग तीनों प्रणालियों का संतुलित उपयोग करते हुए तर्कसंगत एवं व्यवहारिक व्याख्या प्रस्तुत की है, जिससे यह पुस्तक आधुनिक ज्योतिष साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
इस पुस्तक में शामिल प्रमुख विषय
- मुहूर्त शास्त्र का परिचय
- शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
- विवाह मुहूर्त निर्धारण
- अष्टकवर्ग द्वारा मुहूर्त चयन
- पाराशरी पद्धति से विवाह निर्णय
- विवाह में विलंब के योग
- द्वि-विवाह योग
- वैधव्य योग
- विधुर योग
- कुमार योग
- वैवाहिक सुख एवं समस्याएँ
- संतान प्राप्ति के योग
- पुत्र एवं पुत्री जन्म योग
- निःसंतान योग
- गर्भपात के ज्योतिषीय कारण
- संतान क्षति
- पिता-पुत्र संबंध
- पूर्व पुण्य एवं संतान सुख
- जैमिनी सिद्धांत
- वास्तविक कुंडलियों का विश्लेषण
मुख्य विशेषताएँ
- ✔ फलित ज्योतिष के तीन प्रमुख विषयों का विस्तृत अध्ययन
- ✔ पाराशरी, जैमिनी एवं अष्टकवर्ग पद्धति पर आधारित
- ✔ विवाह, मुहूर्त एवं संतान पर व्यावहारिक मार्गदर्शन
- ✔ वास्तविक जन्मकुंडलियों के उदाहरण
- ✔ सरल एवं स्पष्ट हिन्दी भाषा
- ✔ विद्यार्थियों एवं पेशेवर ज्योतिषियों दोनों के लिए उपयोगी
- ✔ आधुनिक एवं पारंपरिक सिद्धांतों का संतुलित समन्वय
- ✔ Sagar Publications का प्रामाणिक संस्करण
यह पुस्तक किनके लिए उपयुक्त है?
- वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थी
- फलित ज्योतिष के शोधकर्ता
- प्रोफेशनल ज्योतिषाचार्य
- विवाह एवं मुहूर्त विशेषज्ञ
- कुंडली विश्लेषक
- ज्योतिष शिक्षक
- प्रतियोगी परीक्षाओं (ज्योतिष) के विद्यार्थी
- ज्योतिष में उन्नत अध्ययन करने वाले पाठक















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