‘खगोल एवं गणित ज्योतिष’ वैदिक ज्योतिष के उस महत्वपूर्ण पक्ष पर आधारित पुस्तक है जिसे गणित ज्योतिष कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष परंपरा में ज्योतिष को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है—
- गणित ज्योतिष (Astronomical & Mathematical Astrology)
- फलित ज्योतिष (Predictive Astrology)
गणित ज्योतिष जन्मकुण्डली निर्माण, ग्रहों की स्थिति, समय निर्धारण तथा विभिन्न ज्योतिषीय गणनाओं का आधार प्रदान करता है, जबकि फलित ज्योतिष उन्हीं गणनाओं के आधार पर भविष्यफल का विश्लेषण करता है। इस पुस्तक का उद्देश्य विद्यार्थियों को गणितीय आधार इतना सुदृढ़ बनाना है कि वे स्वयं शुद्ध कुण्डली निर्माण एवं ग्रह गणना कर सकें।
पुस्तक का महत्व
प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि जो ज्योतिषी गणित, खगोल, वेद एवं शास्त्रीय सिद्धांतों में पारंगत होता है, वही शुद्ध एवं विश्वसनीय फलादेश करने में सक्षम होता है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लेखक दीपक कपूर ने इस पुस्तक में खगोलीय सिद्धांतों तथा ज्योतिषीय गणनाओं को वैज्ञानिक एवं चरणबद्ध शैली में प्रस्तुत किया है। पुस्तक आधुनिक विद्यार्थियों को बिना किसी सॉफ़्टवेयर पर निर्भर हुए स्वयं जन्मकुण्डली एवं आवश्यक गणनाएँ समझने का अवसर प्रदान करती है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- गणित ज्योतिष का क्रमबद्ध अध्ययन।
- खगोलीय सिद्धांतों की सरल व्याख्या।
- जन्मकुण्डली निर्माण की चरणबद्ध विधि।
- षोडशवर्ग (Divisional Charts) की गणना।
- विंशोत्तरी दशा निर्माण एवं गणना।
- ग्रहबल एवं भावबल का विस्तृत अध्ययन।
- उपग्रह (Upagraha) का परिचय।
- पंचांग के पाँच अंगों की व्याख्या।
- पारंपरिक एवं आधुनिक गणना पद्धतियों का समन्वय।
- व्यावहारिक उदाहरणों सहित अध्ययन सामग्री।
- ज्योतिष विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए उत्कृष्ट संदर्भ ग्रंथ।
पुस्तक में प्रमुख विषय
पुस्तक में उपलब्ध विवरणों के अनुसार मुख्यतः निम्न विषयों का अध्ययन कराया गया है—
- ज्योतिष एवं खगोल का संबंध
- भारतीय खगोल विज्ञान का संक्षिप्त इतिहास
- समय मापन की पद्धतियाँ
- सौर एवं नाक्षत्रीय समय
- राशिचक्र का परिचय
- ग्रहों की गति
- नक्षत्र प्रणाली
- पंचांग
- तिथि, वार, योग एवं करण
- जन्मकुण्डली निर्माण
- लग्न गणना
- भाव निर्धारण
- षोडशवर्ग (Divisional Charts)
- ग्रहबल
- भावबल
- उपग्रह
- विंशोत्तरी दशा
- ज्योतिषीय गणना की वैज्ञानिक पद्धति
- व्यवहारिक गणितीय उदाहरण
लेखक परिचय
दीपक कपूर भारत के प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषाचार्यों में गिने जाते हैं। वे भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली के ज्योतिष विभाग में अध्यापन से जुड़े रहे हैं तथा विशेष रूप से प्रश्न ज्योतिष एवं गणित ज्योतिष के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में अनेक महत्वपूर्ण ज्योतिष ग्रंथ लिखे हैं। उनके लेखन की विशेषता विषय की स्पष्टता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा व्यावहारिक उदाहरणों का समावेश है।
यह पुस्तक किन पाठकों के लिए उपयुक्त है?
यह पुस्तक विशेष रूप से—
- वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थी
- गणित ज्योतिष सीखने वाले पाठक
- जन्मकुण्डली निर्माण सीखने वाले विद्यार्थी
- पंचांग अध्ययनकर्ता
- ज्योतिष शिक्षक
- शोधार्थी
- पेशेवर ज्योतिषाचार्य
- भारतीय खगोल एवं ज्योतिष में रुचि रखने वाले पाठक
के लिए अत्यंत उपयोगी है।
इस पुस्तक को क्यों पढ़ें?
यदि आप केवल तैयार सॉफ़्टवेयर द्वारा बनी कुण्डली पर निर्भर नहीं रहना चाहते और स्वयं जन्मकुण्डली निर्माण, ग्रहों की गणना, पंचांग, वर्ग कुण्डलियाँ, ग्रहबल, भावबल तथा विंशोत्तरी दशा की शास्त्रीय पद्धति सीखना चाहते हैं, तो ‘खगोल एवं गणित ज्योतिष’ एक उत्कृष्ट अध्ययन ग्रंथ है। इसकी सरल भाषा, क्रमबद्ध प्रस्तुति तथा गणितीय स्पष्टता इसे ज्योतिष शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी एवं विश्वसनीय पुस्तक बनाती है।















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