नष्ट जातकम् (Nashta Jatakam) – आचार्य मुकुन्द दैवज्ञ
नष्ट जातकम् भारतीय ज्योतिष परंपरा का एक विशिष्ट एवं उपयोगी ग्रंथ है, जिसका मुख्य विषय ऐसे जातकों की जन्मकुंडली का पुनर्निर्माण करना है जिनके जन्म की सही तिथि, समय या अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध नहीं हैं। यह ग्रंथ आचार्य मुकुन्द दैवज्ञ से संबद्ध है और रंजन पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित हिंदी संस्करण में डॉ. शुकदेव चतुर्वेदी की भाषा-टीका प्रस्तुत की गई है। उपलब्ध पुस्तक विवरण के अनुसार इसका उद्देश्य जन्म विवरण के अभाव में नष्ट अथवा अनुपलब्ध जन्मकुंडली को पारंपरिक ज्योतिषीय विधियों द्वारा पुनः निर्धारित करने की प्रक्रिया को समझाना है।
वैदिक ज्योतिष में जन्म का सही समय और तिथि कुंडली निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लेकिन कई परिस्थितियों में व्यक्ति को अपना सही जन्म वर्ष, महीना, तिथि अथवा जन्म समय ज्ञात नहीं होता। ऐसी स्थिति में नष्ट जातक / Lost Horoscopy की पारंपरिक विधियाँ उपयोग में लाई जाती हैं। यह पुस्तक इसी विशेष विषय को केंद्र में रखती है और विभिन्न प्राचीन ज्योतिषीय परंपराओं से प्राप्त नियमों को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।
ग्रंथ में वराह मिहिर, कल्याण वर्मा, अमीरचंद्र तथा केरल ज्योतिष परंपरा से संबंधित सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है। इन विधियों के माध्यम से उपलब्ध संकेतों के आधार पर जन्म वर्ष, ऋतु, मास, तिथि, नक्षत्र, लग्न, नवांश तथा ग्रहों की स्थिति जैसे जन्म संबंधी तत्वों को निर्धारित करने की पारंपरिक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जा सकता है।
विशेष रूप से केरल शास्त्रीय युक्ति प्रकरण इस विषय की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। इसमें नष्ट जन्मकुंडली को पुनः प्राप्त करने के लिए विभिन्न विधियों का वर्णन मिलता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इसमें जन्म विवरण निर्धारित करने के लिए बारह अलग-अलग पद्धतियों का उल्लेख है, जिनमें वर्ष, जन्मकाल, लग्न, नवांश तथा ग्रहों की स्थिति से जुड़े संकेतों का अध्ययन किया जाता है।
पुस्तक में केवल पूर्णतः अज्ञात जन्म विवरण ही नहीं, बल्कि उपलब्ध जन्म विवरण की जांच और संशोधन (rectification) से जुड़े पारंपरिक नियमों का भी अध्ययन मिलता है। शरीर पर मौजूद तिल, चिह्न अथवा अन्य बाह्य संकेतों के आधार पर कुंडली के समय या विवरण को सुधारने की पद्धतियों का उल्लेख भी पुस्तक के विषय-विस्तार में किया गया है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- नष्ट अथवा अनुपलब्ध जन्मकुंडली के पुनर्निर्माण पर केंद्रित ग्रंथ
- जन्म तिथि और जन्म समय के निर्धारण की पारंपरिक ज्योतिषीय विधियाँ
- जन्म वर्ष, ऋतु, मास और तिथि निर्धारित करने के सिद्धांत
- लग्न, नक्षत्र और नवांश से संबंधित गणनात्मक पद्धतियाँ
- वराह मिहिर की परंपरा से जुड़े नियम
- अमीरचंद्र की पद्धति का अध्ययन
- केरल ज्योतिष पद्धति के अंतर्गत नष्ट कुंडली पुनर्निर्माण
- जन्मकुंडली के संशोधन एवं Rectification से संबंधित पारंपरिक नियम
- प्रश्न ज्योतिष से संबंधित उपयोगी सिद्धांत
- प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों से संकलित सूत्र एवं नियम
- ज्योतिष के गंभीर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए संदर्भ सामग्री
किन पाठकों के लिए उपयोगी?
यह पुस्तक वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थियों, ज्योतिष शोधकर्ताओं, प्रश्न ज्योतिष का अध्ययन करने वाले पाठकों, जन्म समय सुधार (Birth Time Rectification) में रुचि रखने वाले ज्योतिषियों तथा पारंपरिक ज्योतिष ग्रंथों के अध्येताओं के लिए उपयोगी संदर्भ हो सकती है।
जो पाठक सामान्य कुंडली विश्लेषण से आगे बढ़कर यह समझना चाहते हैं कि जन्म विवरण उपलब्ध न होने की स्थिति में पारंपरिक ज्योतिषीय पद्धतियों द्वारा जन्मकुंडली का पुनर्निर्माण कैसे किया जाता है, उनके लिए नष्ट जातकम् एक विशिष्ट विषय पर केंद्रित ग्रंथ है।


















Reviews
There are no reviews yet.