उत्तर कालामृत एवं पूर्व कालामृत का यह दो-खंडीय सेट वैदिक ज्योतिष और पारंपरिक फलित ज्योतिष के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण संग्रह है। कालिदास को परंपरागत रूप से इन शास्त्रीय ग्रंथों का रचयिता माना जाता है। प्रस्तुत हिंदी संस्करण में जे. एन. भसीन और डॉ. एस. सी. मिश्रा से संबंधित व्याख्यात्मक एवं संपादकीय योगदान के माध्यम से पाठकों को इन ग्रंथों के ज्योतिषीय सिद्धांतों का अध्ययन करने का अवसर मिलता है। यह सेट रंजन पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित है।
पूर्व कालामृत में ज्योतिष के मूल सिद्धांतों और कुंडली विश्लेषण से संबंधित अनेक विषयों का विवेचन मिलता है। इसमें जन्म समय के निर्धारण, ग्रहों की स्थिति, भावों के फल, ग्रहबल, आयु-विचार, ग्रहों एवं भावों के कारकत्व, दशा-फल तथा प्रश्न ज्योतिष जैसे विषय शामिल हैं। इन सिद्धांतों का अध्ययन पाठकों को जन्मकुंडली के विभिन्न घटकों को समझने और पारंपरिक फलित ज्योतिष की पद्धतियों से परिचित होने में सहायता करता है।
उत्तर कालामृत इस अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक ज्योतिषीय विषयों और विशिष्ट शास्त्रीय प्रसंगों से परिचित कराता है। दोनों खंडों का संयुक्त अध्ययन पाठकों को ग्रंथ की विषय-वस्तु को व्यापक रूप में समझने का अवसर देता है।
इस सेट में ग्रहों के प्राकृतिक एवं कार्यात्मक संबंध, ग्रहों की उच्च और नीच स्थिति, ग्रहों का बल, भावों के कारकत्व और विभिन्न ग्रह-योगों जैसे विषयों का अध्ययन किया जा सकता है। राजयोग, अन्य महत्वपूर्ण ग्रह-संयोग, भावफल और दशा संबंधी सिद्धांत पारंपरिक कुंडली विश्लेषण के प्रमुख अंग हैं। इन विषयों को पढ़कर पाठक समझ सकते हैं कि ज्योतिषीय व्याख्या में केवल एक ग्रह या एक भाव को देखने के बजाय संपूर्ण कुंडली के विभिन्न घटकों का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है।
दशा-फल और प्रश्न ज्योतिष भी इस संग्रह के महत्वपूर्ण अध्ययन क्षेत्र हैं। दशा संबंधी सिद्धांतों के माध्यम से पारंपरिक ज्योतिष में जीवन की विभिन्न घटनाओं के समय और ग्रहों के फल का विश्लेषण किया जाता है। प्रश्न ज्योतिष में किसी विशेष प्रश्न के संदर्भ में कुंडली और संबंधित ज्योतिषीय संकेतों का अध्ययन किया जाता है।
पुस्तक में आयु-विचार, ग्रहों एवं भावों के कारकत्व और विभिन्न भावों में ग्रहों के फल जैसे विषय भी शामिल हैं। इन अवधारणाओं का अध्ययन उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो पारंपरिक ज्योतिषीय साहित्य में प्रयुक्त तकनीकी शब्दावली और सिद्धांतों को अधिक गहराई से समझना चाहते हैं।
मुख्य विषय एवं विशेषताएँ:
• पूर्व कालामृत और उत्तर कालामृत के दो खंडों का संग्रह
• वैदिक एवं पारंपरिक फलित ज्योतिष
• जन्म समय और कुंडली निर्धारण से संबंधित सिद्धांत
• ग्रहों की स्थिति, बल और पारस्परिक संबंध
• भावों के कारकत्व और भावफल
• राजयोग एवं अन्य ग्रह-संयोग
• दशा-फल और पारंपरिक भविष्य-कथन के सिद्धांत
• आयु-विचार और ग्रहों से संबंधित पारंपरिक नियम
• प्रश्न ज्योतिष और कुंडली विश्लेषण
• शास्त्रीय ज्योतिष साहित्य का हिंदी में अध्ययन
यह दो-खंडीय सेट ज्योतिष के विद्यार्थियों, अनुभवी अध्येताओं, शोधार्थियों, अध्यापकों और पारंपरिक भारतीय ज्योतिष साहित्य के संग्रहकर्ताओं के लिए उपयुक्त है। शुरुआती पाठकों को ग्रह, राशि, भाव और दशा जैसी बुनियादी अवधारणाओं की जानकारी होने पर इन ग्रंथों का अध्ययन अधिक सहज हो सकता है।
यदि आप वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथों, ग्रह-भाव संबंधों, योगों, दशाओं और प्रश्न ज्योतिष का अध्ययन हिंदी में करना चाहते हैं, तो उत्तर कालामृत एवं पूर्व कालामृत का यह सेट आपके व्यक्तिगत अध्ययन और ज्योतिष पुस्तकालय के लिए एक उपयोगी संदर्भ संग्रह हो सकता है।

















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