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Bhartiya Darshan Ki Ruprekha by Harendra Prasad Sinha | Indian Philosophy & Darshan Shastra | Hindi Book | MLBD

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भारतीय दर्शन की रूपरेखा प्रो. हरेंद्र प्रसाद सिन्हा द्वारा लिखित हिंदी ग्रंथ है, जिसमें भारतीय दर्शन की प्रमुख विचारधाराओं और सिद्धांतों का व्यवस्थित परिचय मिलता है। पुस्तक में वैदिक एवं उपनिषदिक दर्शन, आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष, भगवद्गीता, चार्वाक, बौद्ध, जैन, न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत दर्शन जैसे विषय शामिल हैं। भारतीय दर्शन का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों और दर्शनशास्त्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह उपयोगी संदर्भ पुस्तक है।

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भारतीय दर्शन की रूपरेखा प्रो. हरेंद्र प्रसाद सिन्हा द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण हिंदी ग्रंथ है, जिसमें भारतीय दर्शन की प्रमुख विचारधाराओं, सिद्धांतों और ऐतिहासिक विकास का व्यवस्थित परिचय प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक भारतीय दार्शनिक परंपरा को समझने के इच्छुक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों और सामान्य पाठकों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।

भारतीय दर्शन केवल आध्यात्मिक चिंतन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन, जगत, ज्ञान, सत्य, आत्मा, ईश्वर, कर्म, मुक्ति और मानव अस्तित्व से जुड़े अनेक मूलभूत प्रश्नों पर विचार किया गया है। इस पुस्तक में विभिन्न दार्शनिक मतों का तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक अध्ययन सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक में ऋग्वेद की दार्शनिक पृष्ठभूमि, वैदिक विचारधारा और उपनिषदों के प्रमुख सिद्धांतों पर चर्चा की गई है। आत्मा, ब्रह्म, माया, मोक्ष तथा जीव और परम तत्त्व के संबंध जैसे विषय भारतीय दर्शन की आधारभूत अवधारणाओं को समझने में सहायता करते हैं। भगवद्गीता के ज्ञानयोग, भक्तियोग और कर्मयोग से संबंधित विचार भी भारतीय दार्शनिक चिंतन के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाते हैं।

इस ग्रंथ का एक प्रमुख भाग भारतीय दर्शन की विभिन्न शाखाओं के अध्ययन पर केंद्रित है। इसमें चार्वाक, बौद्ध, जैन, न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत जैसे दार्शनिक मतों का परिचय मिलता है। प्रत्येक परंपरा वास्तविकता, ज्ञान, जीवन और मुक्ति से जुड़े प्रश्नों को अपने विशिष्ट दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करती है।

न्याय दर्शन के अंतर्गत ज्ञान के साधनों और तर्क-विचार की पद्धतियों को समझने का अवसर मिलता है। वैशेषिक दर्शन पदार्थों और उनके वर्गीकरण से संबंधित विचार प्रस्तुत करता है, जबकि सांख्य दर्शन पुरुष और प्रकृति के संबंध पर केंद्रित है। योग दर्शन मन, अनुशासन और साधना के महत्व को स्पष्ट करता है। मीमांसा में वैदिक व्याख्या और कर्म से संबंधित विचारों का अध्ययन किया जाता है।

पुस्तक में बौद्ध और जैन दर्शन जैसी महत्वपूर्ण श्रमण परंपराओं को भी स्थान दिया गया है। इससे पाठक भारतीय चिंतन की विविधता और विभिन्न दार्शनिक मतों के बीच समानताओं तथा अंतर को समझ सकते हैं। चार्वाक दर्शन के माध्यम से भौतिकवादी और प्रत्यक्ष अनुभव पर केंद्रित दृष्टिकोण से भी परिचय होता है।

वेदांत दर्शन के अंतर्गत आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत और रामानुजाचार्य के विशिष्टाद्वैत जैसे विचारों पर चर्चा की गई है। इन मतों का अध्ययन ब्रह्म, जीव, जगत और मोक्ष के संबंध में भारतीय दार्शनिक परंपरा के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने में सहायता करता है।

पुस्तक के प्रमुख अध्ययन विषय:

• भारतीय दर्शन का इतिहास और विकास
• ऋग्वेद एवं वैदिक दर्शन की विचारधारा
• उपनिषदों के प्रमुख दार्शनिक सिद्धांत
• आत्मा, ब्रह्म, माया और मोक्ष
• भगवद्गीता का ज्ञानयोग, भक्तियोग और कर्मयोग
• चार्वाक दर्शन और भौतिकवादी विचारधारा
• बौद्ध दर्शन और जैन दर्शन
• न्याय एवं वैशेषिक दर्शन
• सांख्य और योग दर्शन
• पूर्व मीमांसा और वेदांत दर्शन
• अद्वैत वेदांत और विशिष्टाद्वैत
• ज्ञान, तर्क, प्रमाण और दार्शनिक विवेचन
• विभिन्न भारतीय दार्शनिक मतों का तुलनात्मक अध्ययन

यह पुस्तक दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों, विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन करने वालों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले पाठकों, शोधार्थियों और भारतीय बौद्धिक परंपरा में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है। इसकी व्यापक विषय-वस्तु पाठकों को भारतीय दर्शन की विभिन्न शाखाओं का एक साथ परिचय प्राप्त करने में सहायता करती है।

यदि आप भारतीय दर्शन के मूल सिद्धांतों, प्रमुख दार्शनिकों और विभिन्न विचारधाराओं के बीच संबंधों को हिंदी में समझना चाहते हैं, तो भारतीय दर्शन की रूपरेखा आपके अध्ययन और संदर्भ संग्रह के लिए एक उपयोगी पुस्तक है।

Weight450 g
Dimensions22 × 14 × 3 cm
Binding

Paperback

Language

Hindi

Publication

Motilal Banarsidass

Author

Harendra Prasad Sinha

Pages

355

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