अष्टांग हृदयम् आयुर्वेद के प्रमुख शास्त्रीय ग्रंथों में से एक है, जिसकी रचना आचार्य वाग्भट से संबंधित मानी जाती है। यह ग्रंथ आयुर्वेद के सिद्धांतों, शरीर-विज्ञान, रोग-विचार, चिकित्सा पद्धतियों, औषधीय अवधारणाओं, आहार-विहार तथा स्वस्थ जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत संस्करण डॉ. ब्रह्मानन्द त्रिपाठी की हिंदी व्याख्या के साथ संस्कृत मूल पाठ को समझने के लिए उपयोगी है।
ग्रंथ की विषय-वस्तु छह प्रमुख स्थानों में व्यवस्थित है—सूत्रस्थान, शरीरस्थान, निदानस्थान, चिकित्सास्थान, कल्पसिद्धिस्थान और उत्तरस्थान। सूत्रस्थान में आयुर्वेद के मूल सिद्धांत, त्रिदोष, धातु, मल, अग्नि, आहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या, औषधि-द्रव्य और जीवन-पद्धति जैसे आधारभूत विषयों का विवेचन मिलता है। शरीरस्थान में शरीर की संरचना, गर्भ-विकास, प्रकृति तथा संबंधित आयुर्वेदिक अवधारणाओं पर चर्चा की जाती है।
निदानस्थान रोगों के कारण, पूर्वरूप, लक्षण, रोग-उत्पत्ति तथा रोग-विचार की पारंपरिक दृष्टि को समझने में सहायक है। चिकित्सास्थान में विभिन्न रोगों के लिए वर्णित आयुर्वेदिक चिकित्सा सिद्धांत, आहार-विहार, औषधीय प्रयोग और उपचार संबंधी पारंपरिक विचार मिलते हैं। कल्पसिद्धिस्थान में शोधन प्रक्रियाओं, औषधीय तैयारी तथा उनसे संबंधित सिद्धांतों का वर्णन है। उत्तरस्थान में बाल चिकित्सा, ऊर्ध्वजत्रु रोग, शल्य, विष-विज्ञान, रसायन और वाजीकरण सहित आयुर्वेद की विभिन्न शाखाओं से संबंधित विषयों का विस्तार मिलता है।
यह पुस्तक आयुर्वेद के विद्यार्थियों, BAMS अध्ययनकर्ताओं, शोधार्थियों, अध्यापकों, पारंपरिक आयुर्वेदिक साहित्य का अध्ययन करने वाले पाठकों तथा संस्कृत मूल ग्रंथ के साथ हिंदी व्याख्या पढ़ने में रुचि रखने वालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। डॉ. ब्रह्मानन्द त्रिपाठी की व्याख्या कठिन संस्कृत श्लोकों और पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों को समझने के लिए अतिरिक्त संदर्भ प्रदान करती है।
अष्टांग हृदयम् में दोष, धातु, अग्नि, रोग-विचार, आहार, दिनचर्या, औषधि, चिकित्सा, शोधन, रसायन और अन्य आयुर्वेदिक विषयों को एक समग्र शास्त्रीय दृष्टिकोण के साथ देखा गया है। इसलिए यह केवल एक सामान्य आयुर्वेद पुस्तक नहीं, बल्कि आयुर्वेद के मूल साहित्य और पारंपरिक चिकित्सा-चिंतन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
यह संस्करण उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो Sanskrit-Hindi format में Ashtang Hridayam का अध्ययन करना चाहते हैं और आयुर्वेद के classical principles को व्यवस्थित रूप से समझना चाहते हैं।


















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