स्वदेशी चिकित्सा सार प्राकृतिक चिकित्सा एवं पारंपरिक घरेलू उपचारों पर आधारित डॉ. अजीत मेहता की सर्वाधिक लोकप्रिय पुस्तकों में से एक है। इसका प्रथम संस्करण वर्ष 1984 में प्रकाशित हुआ था और समय के साथ यह पुस्तक प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय संदर्भ ग्रंथ के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार की गई। इसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रारंभिक संस्करण के कुछ ही समय बाद इसका पुनर्मुद्रण किया गया।
यह पुस्तक सामान्य पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई है, जिसमें जटिल चिकित्सीय शब्दावली के स्थान पर सरल एवं व्यवहारिक भाषा का प्रयोग किया गया है। लेखक ने एक ही रोग के लिए अनावश्यक रूप से अनेक नुस्खे देने के बजाय सीमित, चयनित एवं व्यवस्थित विकल्प प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे पाठकों के लिए उपयुक्त उपायों को समझना आसान हो सके।
पुस्तक का महत्व
भारतीय चिकित्सा परंपरा में स्वास्थ्य संरक्षण का आधार केवल रोग का उपचार नहीं बल्कि संतुलित आहार, उचित दिनचर्या, स्वच्छता, योग, प्राणायाम तथा प्राकृतिक जीवनशैली को माना गया है। स्वदेशी चिकित्सा सार इन्हीं सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें शरीर के विभिन्न अंगों एवं अनेक सामान्य रोगों के लिए पारंपरिक घरेलू उपचारों के साथ-साथ रोगों से बचाव, स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष बल दिया गया है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- प्राकृतिक एवं स्वदेशी चिकित्सा पर आधारित विस्तृत हिंदी पुस्तक।
- सिर से पैर तक अनेक सामान्य रोगों पर व्यवस्थित जानकारी।
- पारंपरिक घरेलू उपचारों का सरल परिचय।
- योग एवं प्राणायाम पर उपयोगी अध्याय।
- रोगों की रोकथाम एवं स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष बल।
- सरल एवं सहज हिंदी भाषा।
- परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए उपयोगी संदर्भ पुस्तक।
- प्राकृतिक चिकित्सा एवं घरेलू स्वास्थ्य देखभाल के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी।
- भारतीय स्वदेशी चिकित्सा परंपरा पर आधारित अध्ययन सामग्री।
- लंबे समय से लोकप्रिय एवं व्यापक रूप से पढ़ी जाने वाली पुस्तक।
पुस्तक में शामिल प्रमुख विषय
संस्करण के अनुसार पुस्तक में निम्नलिखित विषय सम्मिलित हो सकते हैं—
- सिर के रोग
- बाल (केश) संबंधी समस्याएँ
- नेत्र रोग
- नाक के रोग
- दाँत एवं मुख रोग
- गले के रोग
- फेफड़ों के रोग
- हृदय एवं रक्त संचार संबंधी समस्याएँ
- यकृत (लीवर) एवं तिल्ली संबंधी रोग
- पेट एवं पाचन तंत्र के रोग
- आँतों के रोग
- गुर्दे संबंधी समस्याएँ
- गुदा रोग
- त्वचा रोग
- स्त्री रोग
- पुरुष रोग
- बच्चों के सामान्य रोग
- मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विषय
- चोट एवं दुर्घटनाओं की प्राथमिक देखभाल
- योग एवं प्राणायाम
- स्वास्थ्य संरक्षण एवं प्राकृतिक जीवनशैली
लेखक परिचय
डॉ. अजीत मेहता प्राकृतिक चिकित्सा एवं स्वदेशी स्वास्थ्य विषयों के प्रतिष्ठित लेखक हैं। उन्होंने घरेलू उपचार, प्राकृतिक स्वास्थ्य, योग तथा वैकल्पिक चिकित्सा पर अनेक लोकप्रिय पुस्तकें लिखी हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में स्वदेशी चिकित्सा सार, स्वदेशी चिकित्सा के चमत्कार, सूरज किरण चिकित्सा तथा अहिंसक चिकित्सा पद्धतियाँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाएँ सरल भाषा, व्यावहारिक दृष्टिकोण एवं व्यापक उपयोगिता के कारण पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।
यह पुस्तक किन पाठकों के लिए उपयुक्त है?
यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी है—
- प्राकृतिक चिकित्सा के विद्यार्थी
- घरेलू उपचारों में रुचि रखने वाले पाठक
- योग एवं प्राणायाम के अभ्यासकर्ता
- नेचुरोपैथी के अध्ययनकर्ता
- स्वास्थ्य जागरूक परिवार
- आयुष एवं प्राकृतिक चिकित्सा के शोधार्थी
- पुस्तकालय एवं शैक्षणिक संस्थान
- स्वदेशी स्वास्थ्य साहित्य संग्रह करने वाले पाठक
यह पुस्तक क्यों पढ़ें?
यदि आप भारतीय स्वदेशी चिकित्सा परंपरा, प्राकृतिक स्वास्थ्य संरक्षण तथा घरेलू उपचारों का व्यवस्थित अध्ययन करना चाहते हैं, तो स्वदेशी चिकित्सा सार एक उत्कृष्ट संदर्भ ग्रंथ है। इसकी सरल भाषा, व्यवस्थित प्रस्तुति तथा व्यापक विषय-वस्तु इसे सामान्य पाठकों, विद्यार्थियों तथा प्राकृतिक चिकित्सा के गंभीर अध्ययनकर्ताओं के लिए समान रूप से उपयोगी बनाती है। यह पुस्तक प्राकृतिक स्वास्थ्य साहित्य के संग्रह में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।














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