“सामुद्रिक शास्त्रं” भारत की प्राचीन वैज्ञानिक विधा पर आधारित एक मूल्यवान ग्रंथ है, जिसमें मानव शरीर के विभिन्न अंगों जैसे—मुख, नेत्र, ललाट, हाथ, पैर, अंगुलियाँ आदि के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव, भाग्य, स्वास्थ्य, धन, आयु और जीवन की घटनाओं का विश्लेषण किया गया है।
पंडित अभय कात्यायन द्वारा रचित यह ग्रंथ, शरीर विज्ञान और ज्योतिष के समन्वय का एक श्रेष्ठ उदाहरण है, जो हजारों वर्षों से गुरुकुल परंपरा से प्राप्त गूढ़ ज्ञान पर आधारित है।
🌟 मुख्य विशेषताएँ
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मुखाकृति, नेत्र, ललाट, भौंह, नासिका, कान, ओष्ठ, जिव्हा, दंत, हस्तरेखा, नख, चरण चिन्ह आदि का सामुद्रिक विश्लेषण
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प्राचीन ऋषियों द्वारा वर्णित संकेतों का वर्णन
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पुरुष और स्त्री लक्षणों की तुलना और व्याख्या
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भविष्यफल की शारीरिक आधार पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण
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सरल हिंदी में ग्राह्य और स्पष्ट वर्णन
✅ क्यों पढ़ें यह पुस्तक?
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यदि आप व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य को उसके शरीर के अंगों से जानना चाहते हैं
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यदि आप चेहरे की बनावट, चाल-ढाल, और अंग संरचना से मनोविज्ञान और भाग्य जानना चाहते हैं
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यदि आप भारतीय सामुद्रिक शास्त्र को आधुनिक विज्ञान के साथ समझना चाहते हैं
👤 किनके लिए उपयोगी है?
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ज्योतिष के छात्र और शोधकर्ता
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मनोविज्ञान और व्यक्ति विश्लेषण में रुचि रखने वाले
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आयुर्वेद और शारीरिक विज्ञान के विद्यार्थी
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आम पाठक जो प्राचीन ज्ञान में रुचि रखते हैं
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व्यक्ति का पहला आकलन करने वाले प्रोफेशनल (HR, काउंसलर आदि)
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