बृहत् संहिता भारतीय ज्योतिष एवं प्राचीन भारतीय विज्ञान का एक अद्वितीय एवं विश्वप्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसकी रचना महान ज्योतिषाचार्य आचार्य वराहमिहिर ने लगभग छठी शताब्दी में की थी। यह ग्रंथ केवल ज्योतिष तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें खगोल विज्ञान, मौसम विज्ञान, वास्तुशास्त्र, भूगोल, कृषि, रत्नशास्त्र, जलविज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पशु-पक्षी विज्ञान, राजधर्म, सामाजिक जीवन तथा प्राकृतिक संकेतों जैसे अनेक विषयों का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसी कारण इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का विश्वकोश (Encyclopaedia of Ancient Indian Knowledge) भी कहा जाता है।
इस दो-भागीय संस्करण में डॉ. सुरेशचन्द्र मिश्रा ने संस्कृत मूल श्लोकों का सरल एवं विस्तृत हिन्दी अनुवाद तथा व्याख्या प्रस्तुत की है। कठिन ज्योतिषीय सिद्धांतों को आधुनिक पाठकों के लिए सहज भाषा में समझाया गया है, जिससे यह ग्रंथ विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं व्यावसायिक ज्योतिषियों के लिए अत्यंत उपयोगी बन जाता है।
ग्रंथ में ग्रहों के प्रभाव, वर्षा एवं मौसम की भविष्यवाणी, ग्रहण, धूमकेतु, भूकंप, शकुन-अशकुन, भवन निर्माण, नगर नियोजन, मंदिर वास्तु, रत्नों की पहचान, कृषि, वृक्षारोपण, जल स्रोतों की खोज, पशु-पक्षियों के लक्षण, मानव शरीर के संकेत, स्त्री-पुरुष लक्षण, राजकीय विषय तथा अनेक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक विषयों का प्रामाणिक वर्णन मिलता है। यही कारण है कि बृहत् संहिता आज भी भारतीय ज्योतिष एवं प्राचीन विज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में गिनी जाती है।
यह संस्करण लगभग 1015–1016 पृष्ठों में दो भागों में प्रकाशित है तथा संस्कृत मूल पाठ के साथ हिन्दी अनुवाद एवं विस्तृत टिप्पणी प्रदान करता है। यह ग्रंथ वैदिक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र एवं भारतीय संस्कृति का गंभीर अध्ययन करने वाले प्रत्येक पाठक के लिए संग्रहणीय पुस्तक है।
इस पुस्तक में शामिल प्रमुख विषय
- बृहत् संहिता का परिचय
- संस्कृत मूल पाठ
- हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या
- वैदिक ज्योतिष
- खगोल विज्ञान
- ग्रह एवं नक्षत्र
- ग्रहण एवं धूमकेतु
- वर्षा एवं मौसम विज्ञान
- शकुन एवं अपशकुन
- वास्तुशास्त्र
- नगर नियोजन
- मंदिर निर्माण
- रत्नशास्त्र
- कृषि विज्ञान
- भूगोल
- जल स्रोत एवं कुओं का ज्ञान
- वनस्पति विज्ञान
- पशु-पक्षी विज्ञान
- मानव लक्षण विज्ञान
- राजधर्म एवं राजनीति
- प्राकृतिक संकेत
- पारंपरिक भारतीय विज्ञान
मुख्य विशेषताएँ
- ✔ आचार्य वराहमिहिर का विश्वप्रसिद्ध क्लासिकल ग्रंथ
- ✔ संस्कृत मूल पाठ सहित हिन्दी व्याख्या
- ✔ डॉ. सुरेशचन्द्र मिश्रा की विस्तृत टिप्पणी
- ✔ दो भागों (Part 1 & 2) का संपूर्ण सेट
- ✔ लगभग 1016 पृष्ठों का विस्तृत अध्ययन
- ✔ ज्योतिष, वास्तु एवं प्राचीन भारतीय विज्ञान का विश्वकोश
- ✔ सरल एवं सहज हिन्दी भाषा
- ✔ विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं ज्योतिषाचार्यों के लिए उपयोगी
- ✔ संग्रहणीय हार्डबाउंड संस्करण
यह पुस्तक किनके लिए उपयुक्त है?
- वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थी
- ज्योतिषाचार्य
- शोधकर्ता
- संस्कृत एवं भारतीय दर्शन के विद्यार्थी
- वास्तुशास्त्र के अध्ययनकर्ता
- भारतीय संस्कृति एवं इतिहास के शोधकर्ता
- प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी (ज्योतिष एवं संस्कृत)
- आध्यात्मिक एवं धार्मिक साहित्य के पाठक















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