“गीता प्रबोधिनी” स्वामी रामसुखदासजी की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है, जिसमें गीता के उपदेशों को साधारण भाषा और तर्कपूर्ण शैली में समझाया गया है। यह ग्रंथ केवल गीता का भाष्य ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उसका अनुप्रयोग भी बताता है।
इस पुस्तक के माध्यम से पाठक:
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गीता के सार और तत्त्वज्ञान को गहराई से समझ सकते हैं।
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कर्म, भक्ति और ज्ञान योग के महत्व को जान सकते हैं।
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आत्मिक शांति और जीवन की जटिलताओं का समाधान पा सकते हैं।
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अध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग प्राप्त कर सकते हैं।
गीता प्रेस गोरखपुर की यह पुस्तक अध्यात्म-प्रेमियों और गीता के साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
📌 Key Features (मुख्य विशेषताएँ)
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श्रीमद्भगवद्गीता का सरल एवं स्पष्ट विवेचन
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स्वामी रामसुखदासजी की प्रामाणिक व्याख्या
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जीवन-प्रबंधन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन
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गीता प्रेस गोरखपुर का विश्वसनीय प्रकाशन
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गहन तत्त्वज्ञान को सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है
📌 Best For (उपयुक्त पाठक वर्ग)
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श्रीमद्भगवद्गीता के साधक एवं अध्येता
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अध्यात्म और जीवन-प्रबंधन में रुचि रखने वाले
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गीता प्रेस गोरखपुर के ग्रंथ संग्रह करने वाले
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योग, भक्ति और वेदांत दर्शन में रुचि रखने वाले पाठक
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