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Jatak Sardeep (Vol. 1 & 2) in Hindi | Dr. Suresh Chandra Mishra | Classical Hindu Astrology Granth

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‘जातक सारदीप’ भारतीय फलित ज्योतिष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ शास्त्रीय ग्रंथ है, जिसके मूल ग्रंथकार श्री नृसिंह दैवज्ञ माने जाते हैं। यह ग्रंथ लगभग 15वीं शताब्दी में रचा गया और होराशास्त्र की परंपरा में इसका विशिष्ट स्थान है। प्रस्तुत संस्करण में डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र ने संस्कृत मूल श्लोकों का सरल हिन्दी अनुवाद, विस्तृत व्याख्या एवं संदर्भ सहित प्रस्तुतीकरण किया है। Ranjan Publications द्वारा प्रकाशित यह दो-भागीय (Vol. 1 & 2) संस्करण जन्मकुण्डली, ग्रह, भाव, योग, दशा, नवांश, अरिष्ट, राजयोग तथा व्यावहारिक फलादेश के गहन अध्ययन के लिए विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं अनुभवी ज्योतिषाचार्यों हेतु एक उत्कृष्ट संदर्भ ग्रंथ है। इसमें लगभग 2845 संस्कृत श्लोक तथा संपूर्ण होराशास्त्र का क्रमबद्ध विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

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‘जातक सारदीप’ भारतीय वैदिक फलित ज्योतिष के प्रमुख क्लासिकल ग्रंथों में से एक है। इसके मूल रचनाकार श्री नृसिंह दैवज्ञ हैं, जिन्हें त्रिस्कन्ध ज्योतिष का विद्वान आचार्य माना जाता है। यह ग्रंथ दक्षिण भारत में लगभग पन्द्रहवीं शताब्दी में रचा गया तथा बाद के अनेक ज्योतिषाचार्यों ने इसे फलित ज्योतिष के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में स्वीकार किया।

प्रस्तुत संस्करण में डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र ने संस्कृत मूल पाठ का हिन्दी अनुवाद, विस्तृत व्याख्या तथा आवश्यक संदर्भ प्रस्तुत किए हैं। इससे यह ग्रंथ केवल संस्कृत के विद्वानों तक सीमित न रहकर हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी बन गया है।


ग्रंथ का ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय महत्व

‘जातक सारदीप’ को एक संग्रह ग्रंथ (Compendium) माना जाता है। ग्रंथकार ने अपने समय तक उपलब्ध अनेक प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथों—जैसे वशिष्ठ, पराशर, गर्ग, वराहमिहिर, लल्लाचार्य आदि—के उपयोगी सिद्धांतों का चयन कर उन्हें व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया। इस कारण यह पुस्तक केवल एक स्वतंत्र रचना नहीं, बल्कि प्राचीन ज्योतिषीय ज्ञान का सुव्यवस्थित संकलन भी है।

इस ग्रंथ में अनेक ऐसे प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ भी मिलते हैं जो आज दुर्लभ हैं या पूर्ण रूप में उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि शोधकर्ताओं के लिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।


पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ

  • श्री नृसिंह दैवज्ञ द्वारा रचित क्लासिकल ज्योतिष ग्रंथ।
  • संस्कृत मूल पाठ सहित सरल हिन्दी अनुवाद।
  • डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र की विस्तृत व्याख्या।
  • दो भागों में प्रकाशित विस्तृत संस्करण।
  • लगभग 2845 संस्कृत श्लोकों का संकलन।
  • होराशास्त्र का क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित अध्ययन।
  • जन्मकुण्डली विश्लेषण के व्यावहारिक सिद्धांत।
  • दशा फल एवं ग्रहयोगों का विस्तृत विवेचन।
  • नवांश एवं अन्य वर्ग कुण्डलियों का अध्ययन।
  • अनेक दुर्लभ ज्योतिष ग्रंथों के संदर्भ।
  • विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं पेशेवर ज्योतिषियों के लिए उपयुक्त।

पुस्तक में प्रमुख विषय

उपलब्ध विवरणों के अनुसार पुस्तक में मुख्य रूप से निम्न विषयों का विस्तृत अध्ययन मिलता है—

  • ज्योतिष का आधारभूत परिचय
  • ग्रहों का स्वरूप एवं कारकत्व
  • राशियों का विवेचन
  • बारह भावों के फल
  • ग्रह दृष्टि
  • ग्रह युति
  • ग्रहबल
  • नवांश एवं अन्य वर्ग कुण्डलियाँ
  • योग निर्माण
  • राजयोग
  • धनयोग
  • अरिष्ट योग
  • आयु विचार
  • दशा एवं अन्तर्दशा
  • ग्रहयोगों द्वारा फलादेश
  • स्त्री जातक
  • जन्मपत्री का व्यावहारिक विश्लेषण
  • अप्राप्य ज्योतिष ग्रंथों के संदर्भ
  • व्यावहारिक फल निर्णय की पद्धति

लेखक (हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या)

डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र आधुनिक हिन्दी ज्योतिष साहित्य के अग्रणी विद्वानों में गिने जाते हैं। उन्होंने अनेक क्लासिकल संस्कृत ज्योतिष ग्रंथों का हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या प्रस्तुत की है। उनकी विशेषता यह है कि वे मूल शास्त्रीय भाव को सुरक्षित रखते हुए कठिन विषयों को सरल एवं अध्ययनयोग्य भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनके अनुवाद विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा पेशेवर ज्योतिषियों के बीच व्यापक रूप से लोकप्रिय हैं।


मूल ग्रंथकार

श्री नृसिंह दैवज्ञ भारतीय ज्योतिष परंपरा के प्रसिद्ध आचार्य माने जाते हैं। उन्होंने अपने समय तक उपलब्ध प्रमुख होरा ग्रंथों के सार का संकलन कर ‘जातक सारदीप’ की रचना की। इस ग्रंथ का उद्देश्य जन्मकुण्डली के व्यावहारिक एवं सटीक फलादेश को सरल एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना था।


यह पुस्तक किन पाठकों के लिए उपयुक्त है?

यह पुस्तक विशेष रूप से—

  • वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थी
  • फलित ज्योतिष के शोधार्थी
  • पेशेवर ज्योतिषाचार्य
  • संस्कृत एवं हिन्दी ज्योतिष साहित्य के अध्ययनकर्ता
  • जन्मकुण्डली विश्लेषण सीखने वाले विद्यार्थी
  • विश्वविद्यालय स्तर के शोधकर्ता
  • क्लासिकल ज्योतिष ग्रंथों के संग्राहक

के लिए अत्यंत उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।


इस पुस्तक को क्यों पढ़ें?

यदि आप केवल सामान्य ज्योतिष नहीं, बल्कि शास्त्रीय फलित ज्योतिष का गहन अध्ययन करना चाहते हैं, तो जातक सारदीप एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें ग्रह, भाव, योग, दशा तथा जन्मकुण्डली विश्लेषण के अनेक व्यावहारिक सिद्धांत क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किए गए हैं। संस्कृत मूल पाठ के साथ हिन्दी व्याख्या होने के कारण यह पुस्तक पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक पाठकों के लिए सहज और अध्ययनयोग्य बनाती है।

Weight1000 g
Dimensions24 × 14 × 6 cm
Binding

Hardcover

Language

Hindi

Publication

Ranjan Publications

Author

Dr. Suresh Chandra Mishra

Pages

689

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