‘षट्पंचाशिका’ (Shat Panchashika) भारतीय प्रश्न ज्योतिष (Prashna Shastra) की सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक रचनाओं में से एक मानी जाती है। इस ग्रंथ के रचयिता आचार्य पृथुयश हैं, जिन्हें महान ज्योतिषाचार्य वराहमिहिर का सुपुत्र माना जाता है। प्रश्न ज्योतिष की परंपरा में इस ग्रंथ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है और कई शताब्दियों से यह ज्योतिषाचार्यों द्वारा अध्ययन एवं व्यवहार में प्रयुक्त होता आया है।
Ranjan Publications द्वारा प्रकाशित इस संस्करण में डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र ने संस्कृत मूल श्लोकों का सरल हिन्दी अनुवाद, विस्तृत व्याख्या तथा व्यवहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। इससे यह पुस्तक केवल संस्कृत विद्वानों तक सीमित न रहकर हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी बन जाती है।
ग्रंथ का ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय महत्व
षट्पंचाशिका प्रश्न ज्योतिष की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें जन्मकुण्डली उपलब्ध न होने पर प्रश्न पूछे जाने के समय के आधार पर ज्योतिषीय विश्लेषण किया जाता है। भारतीय ज्योतिष में इसे प्रश्न शास्त्र की एक महत्वपूर्ण शाखा माना गया है।
यह ग्रंथ अपनी संक्षिप्तता के बावजूद अत्यंत गहन है। केवल 56 श्लोकों में प्रश्न ज्योतिष के मूल सिद्धांतों का सार प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में विभिन्न प्रकार के जीवन संबंधी प्रश्नों के समाधान हेतु पारंपरिक नियम, योग, ग्रह स्थिति एवं प्रश्न लग्न के आधार पर विचार करने की विधि बताई गई है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- आचार्य पृथुयश द्वारा रचित प्राचीन प्रश्न ज्योतिष ग्रंथ।
- लगभग 1400 वर्ष पुरानी शास्त्रीय परंपरा पर आधारित।
- केवल 56 श्लोकों में प्रश्न विज्ञान का सार।
- संस्कृत मूल पाठ सहित सरल हिन्दी व्याख्या।
- डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र की विस्तृत टिप्पणी।
- प्रश्न कुंडली विश्लेषण की क्रमबद्ध पद्धति।
- विविध जीवन संबंधी प्रश्नों का शास्त्रीय विवेचन।
- उदाहरण सहित सरल प्रस्तुति।
- विभिन्न मतों की समीक्षा एवं तुलनात्मक विवेचन।
- प्रश्न ज्योतिष के विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए उत्कृष्ट संदर्भ ग्रंथ।
पुस्तक में प्रमुख विषय
इस पुस्तक में उपलब्ध विवरणों के अनुसार मुख्यतः निम्न विषयों का अध्ययन किया गया है—
- प्रश्न ज्योतिष का परिचय
- प्रश्न लग्न का निर्धारण
- प्रश्न कुंडली के सिद्धांत
- ग्रहों का प्रश्नफल
- शुभ एवं अशुभ संकेत
- प्रश्न के समय ग्रहों की स्थिति
- कार्य सिद्धि एवं असिद्धि विचार
- धन संबंधी प्रश्न
- विवाह संबंधी प्रश्न
- यात्रा एवं विदेश संबंधी प्रश्न
- रोग एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रश्न
- खोई हुई वस्तुओं का प्रश्न
- विवाद एवं न्याय संबंधी प्रश्न
- प्रश्न फल के विशेष योग
- व्यवहारिक उदाहरण
- विभिन्न आचार्यों के मतों की समीक्षा
हिन्दी व्याख्या की विशेषता
डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र ने संस्कृत के संक्षिप्त एवं गूढ़ श्लोकों को सरल हिन्दी में समझाते हुए प्रत्येक सिद्धांत की व्यवहारिक उपयोगिता स्पष्ट की है। पुस्तक में उदाहरण, विस्तृत टिप्पणियाँ एवं विभिन्न विद्वानों के मतों का उल्लेख इसे सामान्य अनुवाद से कहीं अधिक उपयोगी बनाता है। प्रश्न ज्योतिष का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह संस्करण विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
यह पुस्तक किन पाठकों के लिए उपयुक्त है?
यह पुस्तक विशेष रूप से—
- प्रश्न ज्योतिष (Horary Astrology) के विद्यार्थी
- वैदिक ज्योतिष के शोधार्थी
- पेशेवर ज्योतिषाचार्य
- संस्कृत एवं हिन्दी ज्योतिष साहित्य के अध्ययनकर्ता
- ज्योतिष शिक्षक
- प्रतियोगी एवं उच्चस्तरीय शोध विद्यार्थी
- प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों के संग्रहकर्ता
के लिए अत्यंत उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।
इस पुस्तक को क्यों पढ़ें?
यदि आप प्रश्न कुंडली, प्रश्न ज्योतिष, तथा जन्मकुण्डली के अभाव में पारंपरिक ज्योतिषीय निर्णय की शास्त्रीय विधि को समझना चाहते हैं, तो ‘षट्पंचाशिका’ एक अनिवार्य अध्ययन ग्रंथ है। डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र की विस्तृत हिन्दी व्याख्या, उदाहरणों सहित सरल प्रस्तुति तथा शास्त्रीय प्रामाणिकता इसे अध्ययन, अध्यापन एवं व्यवहारिक उपयोग—तीनों दृष्टियों से अत्यंत मूल्यवान बनाती है।

















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