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Shri Ramagya Prashna | Ramagya Prashna Code 109 | Goswami Tulsidas | Gita Press Gorakhpur | Hindi Book

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श्री रामाज्ञा प्रश्न (Shri Ramagya Prashna) गोस्वामी तुलसीदास जी से संबंधित एक विशिष्ट धार्मिक एवं प्रश्न-विचार ग्रंथ है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित Code No. 109 का यह हिंदी संस्करण उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो रामभक्ति, तुलसीदास साहित्य तथा पारंपरिक प्रश्न-विचार पद्धति का अध्ययन करना चाहते हैं।

यह ग्रंथ सामान्य रामायण-पाठ की पुस्तकों से अलग है, क्योंकि इसमें श्रीराम की आज्ञा को आधार बनाकर प्रश्न के संबंध में संकेत प्राप्त करने की पारंपरिक व्यवस्था का संबंध रामकथा के प्रसंगों से जोड़ा गया है।

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श्री रामाज्ञा प्रश्न गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम से संबद्ध एक विशिष्ट ग्रंथ है। इसका संबंध श्रीरामभक्ति, रामकथा और पारंपरिक प्रश्न-विचार की परंपरा से है।

गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस संस्करण का Code No. 109 है और पुस्तक हिंदी भाषा में उपलब्ध है।

यह पुस्तक उन धार्मिक ग्रंथों में विशेष स्थान रखती है जिनमें श्रीराम के चरित्र और रामकथा के प्रसंगों को केवल कथा के रूप में देखने के बजाय प्रश्न के संदर्भ में संकेत प्राप्त करने की परंपरा से जोड़ा गया है।


श्री रामाज्ञा प्रश्न क्या है?

रामाज्ञा प्रश्न नाम से ही इसके मूल भाव का संकेत मिलता है—अर्थात् किसी प्रश्न या परिस्थिति के संबंध में श्रीराम की आज्ञा अथवा संकेत को जानने का पारंपरिक प्रयास।

इस ग्रंथ की पद्धति को आधुनिक भविष्यवाणी या वैज्ञानिक भविष्य-कथन के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। इसे भारतीय धार्मिक एवं पारंपरिक प्रश्न-विचार साहित्य के संदर्भ में समझना अधिक उपयुक्त है।

पाठक इसमें दिए गए पारंपरिक क्रम और संकेतों के माध्यम से अपने प्रश्न पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विचार कर सकता है।


ग्रंथ की विशेषता

रामाज्ञा प्रश्न की खास बात यह है कि इसमें रामकथा और प्रश्न-विचार का एक विशिष्ट संयोजन दिखाई देता है।

गोस्वामी तुलसीदास जी की रामभक्ति परंपरा में भगवान श्रीराम के चरित्र, मर्यादा, धर्म और भक्ति का विशेष महत्व है। इसी धार्मिक पृष्ठभूमि में रामाज्ञा प्रश्न को पढ़ने पर यह केवल प्रश्न पूछने की विधि न रहकर श्रीराम के प्रति श्रद्धा और समर्पण से जुड़ा हुआ ग्रंथ भी बन जाता है।


पुस्तक का धार्मिक महत्व

श्रीराम भारतीय धार्मिक एवं भक्तिपरंपरा में मर्यादा, धर्म, आदर्श चरित्र और भक्ति के प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं। तुलसीदास जी की रचनाओं में श्रीराम के चरित्र को विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है।

श्री रामाज्ञा प्रश्न इसी रामभक्ति परंपरा के एक अलग पक्ष को सामने रखता है, जिसमें श्रीराम से संबंधित प्रसंगों को प्रश्न-विचार की पारंपरिक व्यवस्था के साथ जोड़ा गया है।


पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ

  • गोस्वामी तुलसीदास जी से संबद्ध महत्वपूर्ण ग्रंथ।
  • श्रीरामभक्ति एवं रामकथा से संबंधित।
  • पारंपरिक प्रश्न-विचार की विशिष्ट पद्धति से संबंधित।
  • Gita Press Gorakhpur द्वारा प्रकाशित।
  • Code No. 109
  • हिंदी भाषा में उपलब्ध।
  • धार्मिक एवं आध्यात्मिक अध्ययन के लिए उपयोगी।
  • तुलसीदास साहित्य के अध्ययन में महत्वपूर्ण।
  • रामभक्ति परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी।
  • पारंपरिक भारतीय प्रश्न-विचार साहित्य का अध्ययन करने वाले पाठकों के लिए संदर्भ सामग्री।

श्रीराम और प्रश्न-विचार की परंपरा

भारतीय परंपरा में किसी महत्वपूर्ण निर्णय या परिस्थिति के समय ईश्वर की इच्छा और संकेत को जानने की विभिन्न धार्मिक पद्धतियाँ रही हैं। रामाज्ञा प्रश्न इसी व्यापक परंपरा के संदर्भ में देखा जाता है।

इसमें प्रश्न करने वाला व्यक्ति अपने विषय को लेकर श्रीराम की शरण और आज्ञा को महत्व देता है। इस कारण ग्रंथ का उपयोग केवल किसी परिणाम को जानने के लिए ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, आत्मचिंतन और धार्मिक दृष्टिकोण के साथ भी किया जा सकता है।


यह पुस्तक किन पाठकों के लिए उपयोगी है?

यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी है:

  • गोस्वामी तुलसीदास जी के साहित्य के पाठकों के लिए
  • श्रीरामभक्तों के लिए
  • रामकथा एवं रामभक्ति साहित्य के अध्येताओं के लिए
  • पारंपरिक प्रश्न-विचार में रुचि रखने वालों के लिए
  • भारतीय धार्मिक साहित्य के संग्रहकर्ताओं के लिए
  • ज्योतिष एवं पारंपरिक प्रश्न-पद्धतियों का अध्ययन करने वाले पाठकों के लिए
  • धार्मिक पुस्तकालयों के लिए
  • तुलसी साहित्य के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए

अन्य रामायण पुस्तकों से अलग

श्री रामचरितमानस मुख्यतः श्रीराम की विस्तृत कथा, भक्ति और आदर्श चरित्र को प्रस्तुत करता है, जबकि रामाज्ञा प्रश्न का स्वरूप अलग है।

इस ग्रंथ की विशेषता रामकथा से जुड़े तत्वों और प्रश्न-विचार की परंपरा का संयोजन है। इसलिए इसे केवल रामचरितमानस का संक्षिप्त संस्करण या सामान्य रामायण पुस्तक कहना सही नहीं होगा।


गोस्वामी तुलसीदास जी

गोस्वामी तुलसीदास जी हिंदी भक्ति साहित्य के महान कवियों में माने जाते हैं। उनका साहित्य भगवान श्रीराम की भक्ति और रामकथा की परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है।

उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति श्रीरामचरितमानस है, जिसके माध्यम से रामकथा को अवधी भाषा में व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।

तुलसीदास जी से संबंधित अन्य ग्रंथों का अध्ययन करने पर उनकी रामभक्ति, धर्म, नीति और आध्यात्मिक दृष्टि के विभिन्न पक्षों को समझने में सहायता मिलती है। रामाज्ञा प्रश्न इसी साहित्यिक-धार्मिक परंपरा का एक विशिष्ट ग्रंथ है।

Weight250 g
Dimensions22 × 14 × 3 cm
Binding

Paperback

Language

Hindi

Publication

Gita Press Gorakhpur

Author

Goswami Tulsidas

Pages

96

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