स्वर्ण तंत्र (Svarna Tantra) वैद्य श्याम सुंदर द्वारा रचित एक पारंपरिक आयुर्वेदिक रसशास्त्र ग्रंथ है। यह पुस्तक भस्म, कुष्टेजात दर्पण तथा कूपीपाक्व रसायन जैसे विषयों को अपने शीर्षक में समाहित करती है। संस्कृत मूल पाठ एवं हिंदी अनुवाद के साथ यह ग्रंथ आयुर्वेद के शास्त्रीय साहित्य और पारंपरिक रसशास्त्र के अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक है।
रसशास्त्र आयुर्वेद की वह महत्वपूर्ण शाखा है जिसमें पारंपरिक औषधीय पदार्थों, धातुओं, खनिजों तथा उनसे संबंधित शोधन एवं प्रसंस्करण की अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है। भस्म और कूपीपाक्व रसायन इसी पारंपरिक औषध-निर्माण साहित्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। यह पुस्तक इन विषयों से संबंधित शास्त्रीय ज्ञान को समझने और पारंपरिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के अध्ययन के लिए संदर्भ प्रदान करती है।
पुस्तक में उल्लिखित प्रमुख विषयों के आधार पर इसका अध्ययन निम्नलिखित क्षेत्रों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी हो सकता है:
• भस्म शास्त्र एवं पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधीय साहित्य
• रसशास्त्र के सिद्धांत और पारंपरिक शब्दावली
• कूपीपाक्व रसायन से संबंधित शास्त्रीय अवधारणाएँ
• संस्कृत आयुर्वेदिक ग्रंथों को हिंदी अनुवाद के साथ पढ़ना
• भारतीय पारंपरिक औषध-विज्ञान का अध्ययन
• आयुर्वेद के ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय साहित्य का संदर्भ अध्ययन
संस्कृत और हिंदी के संयुक्त प्रारूप में उपलब्ध यह ग्रंथ उन पाठकों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जो मूल पारंपरिक शब्दावली को समझते हुए हिंदी में अध्ययन करना चाहते हैं। आयुर्वेद के विद्यार्थी, रसशास्त्र के अध्येता, शोधार्थी, शिक्षक तथा भारतीय चिकित्सा परंपरा के साहित्य में रुचि रखने वाले पाठक इसे अपने व्यक्तिगत अध्ययन या पुस्तकालय संग्रह में शामिल कर सकते हैं।
वैद्य श्याम सुंदर की यह पुस्तक D.P.B. Publications द्वारा प्रकाशित है। इसका विषयगत फोकस इसे सामान्य आयुर्वेद परिचय पुस्तकों से अलग बनाता है, क्योंकि इसका शीर्षक विशेष रूप से भस्म, कुष्टेजात दर्पण और कूपीपाक्व रसायन जैसे विशिष्ट पारंपरिक विषयों पर केंद्रित है।

















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