वास्तु विद्या भारतीय परंपरा में वर्णित वास्तु शास्त्र के मूल सिद्धांतों को समझाने वाली एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। प्राचीन भारत में वास्तु शास्त्र को भवन निर्माण की एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पद्धति माना गया है, जिसमें दिशाओं, पंचतत्वों और ऊर्जा संतुलन का विशेष महत्व होता है।
इस पुस्तक में लेखक P. Satish Sharma ने वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों को सरल और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें बताया गया है कि किसी भवन, घर, मंदिर या कार्यालय के निर्माण के समय दिशा, भूमि, प्रवेश द्वार, कक्षों की व्यवस्था और ऊर्जा प्रवाह का ध्यान कैसे रखा जाना चाहिए।
पुस्तक में वास्तु के पारंपरिक नियमों के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर भी प्रकाश डाला गया है। इससे पाठक यह समझ सकते हैं कि वास्तु सिद्धांतों का पालन करके घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और संतुलन कैसे प्राप्त किया जा सकता है।
Motilal Banarsidass International द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक वास्तु शास्त्र के अध्ययन के लिए एक उपयोगी और ज्ञानवर्धक ग्रंथ मानी जाती है।
📚 इस पुस्तक में प्रमुख विषय
वास्तु शास्त्र का परिचय
पंचतत्व और दिशाओं का महत्व
घर और भवन निर्माण के वास्तु नियम
भूमि चयन और भवन योजना
सकारात्मक ऊर्जा और वास्तु संतुलन
वास्तु दोष और उनके समाधान
⭐ पुस्तक की विशेषताएँ
✔ भारतीय वास्तु शास्त्र के मूल सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन
✔ भवन निर्माण और वास्तु योजना की जानकारी
✔ वास्तु के व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश
✔ सरल और समझने योग्य प्रस्तुति
✔ वास्तु शास्त्र के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी












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