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Vigyan Bhairava by Vraj Vallabh Dwivedi | 112 Meditation Techniques & Kashmir Shaivism | Sanskrit-Hindi Commentary | Shiva Shakti philosophy

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विज्ञान भैरव संस्कृत-हिंदी व्याख्या प्रो. व्रज वल्लभ द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत भारतीय तंत्र, ध्यान-साधना और कश्मीर शैवदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें शिव-शक्ति संवाद, परम चेतना, ध्यान-धारणा और लगभग 112 ध्यान विधियों से जुड़े विचारों का अध्ययन किया जा सकता है। संस्कृत मूल पाठ और हिंदी व्याख्या वाला यह संस्करण योग, ध्यान, भारतीय दर्शन तथा आध्यात्मिक साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी है।

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विज्ञान भैरव संस्कृत-हिंदी व्याख्या भारतीय तंत्र, ध्यान-साधना और कश्मीर शैवदर्शन की परंपरा से संबंधित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। प्रो. व्रज वल्लभ द्विवेदी द्वारा व्याख्यायित यह पुस्तक संस्कृत के मूल पाठ और हिंदी व्याख्या के माध्यम से विज्ञान भैरव की दार्शनिक एवं साधनात्मक विषय-वस्तु को समझने का अवसर प्रदान करती है। यह संस्करण उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक साहित्य को मूल भाषा के साथ हिंदी में पढ़ना चाहते हैं।

ग्रंथ का आधार भगवान भैरव और देवी भैरवी के बीच संवाद है। इसमें परम चेतना, ध्यान, धारणा, मन की एकाग्रता और आत्मबोध से संबंधित गहन प्रश्नों पर विचार किया गया है। इसकी विशेष पहचान लगभग 112 ध्यान-धारणाओं का वर्णन है, जिनमें श्वास, ध्वनि, इंद्रिय-अनुभव, आंतरिक एकाग्रता और चेतना के विभिन्न पहलुओं को ध्यान के आधार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

पुस्तक में ध्यान को केवल किसी एक निश्चित विधि तक सीमित नहीं देखा गया है। विभिन्न धारणाओं के माध्यम से साधक अपने अनुभव, मन की प्रवृत्तियों और एकाग्रता के स्वरूप का अध्ययन कर सकता है। श्वास और प्राण पर ध्यान, ध्वनि के प्रति सजगता, संवेदनाओं का अवलोकन, आंतरिक मौन तथा अनुभव के क्षणों में जागरूकता जैसे विषय इस ग्रंथ की व्यापक साधना-दृष्टि को समझने में मदद करते हैं।

विज्ञान भैरव का संबंध कश्मीर शैवदर्शन और अद्वैत चेतना-विचार की परंपरा से भी है। इसमें साधना के विभिन्न उपायों, प्राणशक्ति, शून्यता, मन की गतिविधियों और परम तत्त्व के स्वरूप से संबंधित विचार मिलते हैं। इस कारण पुस्तक केवल ध्यान की विधियों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और तांत्रिक साधना की वैचारिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

संस्कृत-हिंदी प्रारूप इस पुस्तक की विशेष उपयोगिता है। मूल संस्कृत पाठ का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अध्यापकों के साथ-साथ हिंदी में आध्यात्मिक साहित्य पढ़ने वाले सामान्य पाठकों के लिए भी यह उपयोगी संदर्भ बन सकती है। हिंदी व्याख्या कठिन दार्शनिक शब्दावली और पारंपरिक अवधारणाओं को समझने में सहायता प्रदान करती है।

यह पुस्तक निम्नलिखित विषयों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयुक्त है:

• विज्ञान भैरव तंत्र और भारतीय तंत्र साहित्य
• 112 ध्यान विधियाँ और ध्यान-धारणा
• कश्मीर शैवदर्शन और शैव दर्शन
• शिव-शक्ति संवाद एवं चेतना का स्वरूप
• संस्कृत ग्रंथों का हिंदी व्याख्या सहित अध्ययन
• योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना
• प्राण, शून्यता, एकाग्रता और आत्मबोध
• भारतीय दर्शन और पारंपरिक आध्यात्मिक साहित्य

प्रो. व्रज वल्लभ द्विवेदी की व्याख्या सहित यह संस्करण उन पाठकों के लिए एक उपयोगी विकल्प है जो विज्ञान भैरव के मूल विचारों को व्यवस्थित ढंग से समझना चाहते हैं। इसे व्यक्तिगत अध्ययन, शोध, आध्यात्मिक पुस्तकालय तथा भारतीय दर्शन और ध्यान-साधना से संबंधित संग्रह में शामिल किया जा सकता है।

Weight350 g
Dimensions22 × 14 × 3 cm
Binding

Paperback

Language

Hindi

Publication

Motilal Banarsidass

Author

Vraj Vallabh Dwivedi

Pages

198

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