‘वृद्ध यवन जातकम’ भारतीय फलित ज्योतिष की उन दुर्लभ एवं प्राचीन रचनाओं में से एक है, जिन्हें ज्योतिष परंपरा में अत्यंत सम्मान प्राप्त है। विद्वानों के अनुसार यह ग्रंथ यवन ज्योतिष पर आधारित प्राचीन भारतीय ज्ञानधारा का महत्वपूर्ण प्रतिनिधि है। आधुनिक पाठकों की सुविधा के लिए डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र ने इसका हिन्दी अनुवाद, व्याख्या एवं विश्लेषण प्रस्तुत किया है, जिससे संस्कृत के गूढ़ श्लोकों का अध्ययन सरल हो जाता है।
यह ग्रंथ केवल श्लोक-संग्रह नहीं है, बल्कि फलित ज्योतिष के सिद्धांतों को व्यावहारिक दृष्टि से समझने का एक विस्तृत मार्गदर्शक भी है। इसमें ग्रहों की स्थिति, भावों के फल, दृष्टियों का प्रभाव, योगों का निर्माण, दशा-विचार तथा अनेक पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों का व्यवस्थित निरूपण किया गया है।
पुस्तक का ऐतिहासिक महत्व
‘वृद्ध यवन जातकम’ को भारतीय ज्योतिष साहित्य की प्राचीन धरोहरों में गिना जाता है। यवन परंपरा एवं भारतीय होरा शास्त्र के अनेक सिद्धांतों का समन्वय इस ग्रंथ की विशेषता है। यह ग्रंथ लंबे समय तक दुर्लभ रहा, जिसके कारण इसका अध्ययन सीमित विद्वानों तक ही रहा। आधुनिक संस्करणों ने इसे पुनः अध्ययन एवं शोध के लिए उपलब्ध कराया है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- दो खंडों (2 Volume Set) में प्रकाशित विस्तृत ग्रंथ।
- लगभग 4500 संस्कृत श्लोक हिन्दी अर्थ एवं व्याख्या सहित।
- फलित ज्योतिष के शास्त्रीय सिद्धांतों का विस्तृत अध्ययन।
- ग्रह, राशि, भाव एवं दृष्टि फल का क्रमबद्ध विवेचन।
- षड्वर्ग एवं अष्टवर्ग पर उपयोगी जानकारी।
- दशा एवं अन्तर्दशा विचार।
- स्त्री एवं पुरुष जातक का पृथक अध्ययन।
- राजयोग एवं शुभ-अशुभ योगों का विश्लेषण।
- नक्षत्र ज्योतिष का समावेश।
- संहिता, शकुन, स्वप्न तथा मृत्यु संबंधी पारंपरिक विषयों का उल्लेख।
- हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए सरल व्याख्या।
पुस्तक में प्रमुख विषय
इस संस्करण में उपलब्ध सामग्री में मुख्य रूप से निम्न विषय सम्मिलित हैं—
- यवन ज्योतिष की मूल अवधारणाएँ
- ग्रहों का स्वरूप एवं प्रभाव
- राशियों का विस्तृत अध्ययन
- बारह भावों के फल
- ग्रह दृष्टि
- षड्वर्ग विचार
- अष्टवर्ग
- ग्रहबल
- दशा एवं अन्तर्दशा
- नक्षत्र विचार
- राजयोग
- शुभ एवं अशुभ योग
- स्त्री जातक
- पुरुष जातक
- संहिता विषय
- शकुन विचार
- स्वप्न फल
- मृत्यु विचार
- जन्मफल विश्लेषण
लेखक (व्याख्याकार) परिचय
डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र आधुनिक हिन्दी ज्योतिष साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वानों में गिने जाते हैं। उन्होंने अनेक प्राचीन संस्कृत ज्योतिष ग्रंथों का हिन्दी अनुवाद एवं विस्तृत भाष्य प्रस्तुत किया है। उनके कार्य का उद्देश्य पारंपरिक ज्योतिष ग्रंथों को हिन्दी पाठकों एवं विद्यार्थियों के लिए सरल और अध्ययनयोग्य बनाना है।





















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