“Kya Guru Bina Mukti Nahi?” (क्या गुरु बिना मुक्ति नहीं?) शिव गंगा द्वारा रचित एक गहन आध्यात्मिक कृति है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन में गुरु का स्थान सर्वोपरि माना गया है। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि गुरु का मार्गदर्शन ही साधक को अज्ञान से ज्ञान और बंधन से मुक्ति की ओर ले जाता है।
इस ग्रंथ में बताया गया है कि केवल शास्त्र पढ़ने या पूजा-पाठ करने से अंतिम सत्य की प्राप्ति कठिन है। एक सच्चे गुरु का सान्निध्य और उनकी कृपा साधक को सही दिशा देती है और आत्मज्ञान के मार्ग पर अग्रसर करती है।
यह पुस्तक आध्यात्मिक साधकों, जिज्ञासुओं और भक्तों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।
📌 Key Features (मुख्य विशेषताएँ)
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गुरु और शिष्य संबंध की गहन व्याख्या
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मुक्ति प्राप्ति में गुरु की अनिवार्यता पर प्रकाश
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सरल हिंदी भाषा में अध्यात्मिक विवेचना
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साधकों और जिज्ञासुओं के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ
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शिव गंगा द्वारा रचित आध्यात्मिक पुस्तक
📌 Best For (उपयुक्त पाठक वर्ग)
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अध्यात्म और दर्शन में रुचि रखने वाले पाठक
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गुरु-शिष्य परंपरा को समझने वाले साधक
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आत्मज्ञान और मुक्ति के मार्ग पर चलने वाले
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संत साहित्य और वैदिक ज्ञान के विद्यार्थी
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भक्त, योगी और साधक वर्ग
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