‘मुहूर्त चिन्तामणि’ वैदिक ज्योतिष के मुहूर्त शास्त्र का एक अत्यंत प्रसिद्ध एवं सम्मानित ग्रंथ है। इसका मूल रचनाकार आचार्य राम दैवज्ञ हैं, जिनका यह ग्रंथ कई शताब्दियों से ज्योतिष विद्वानों द्वारा अध्ययन एवं संदर्भ के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। प्रस्तुत संस्करण में डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र ने संस्कृत मूल श्लोकों का हिन्दी अनुवाद, व्याख्या तथा आवश्यक स्पष्टीकरण देकर इसे आधुनिक पाठकों के लिए अधिक उपयोगी बनाया है। यह संस्करण रंजन पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित किया गया है।
भारतीय ज्योतिष में केवल ग्रहों की स्थिति जानना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि किसी भी शुभ कार्य को उचित समय पर आरम्भ करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी उद्देश्य से मुहूर्त शास्त्र का विकास हुआ। यह ग्रंथ विभिन्न कार्यों के लिए शुभ एवं अशुभ समय के निर्धारण के सिद्धांतों का व्यवस्थित अध्ययन प्रस्तुत करता है।
मुहूर्त शास्त्र का महत्व
वैदिक परम्परा में विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, प्रतिष्ठा, यज्ञ, संस्कार, यात्रा, व्यवसाय प्रारम्भ, भवन निर्माण तथा अनेक धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों से पूर्व शुभ मुहूर्त का चयन किया जाता है। यह ग्रंथ पंचांग, तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, लग्न तथा ग्रहों की स्थिति के आधार पर मुहूर्त चयन की शास्त्रीय प्रक्रिया का अध्ययन कराता है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- संस्कृत मूल ग्रंथ के साथ सरल हिन्दी व्याख्या।
- मुहूर्त शास्त्र के शास्त्रीय सिद्धांतों का क्रमबद्ध प्रस्तुतीकरण।
- पंचांग के पाँचों अंगों का व्यावहारिक उपयोग।
- विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए मुहूर्त चयन के नियम।
- विवाह, गृह प्रवेश, प्रतिष्ठा, यात्रा एवं व्यापार सम्बन्धी मुहूर्तों का विवेचन।
- विद्यार्थियों एवं व्यावसायिक ज्योतिषियों दोनों के लिए उपयोगी।
- अध्ययन, अध्यापन एवं शोध के लिए उपयुक्त संदर्भ ग्रंथ।
पुस्तक में प्रमुख विषय
इस ग्रंथ में विभिन्न संस्करणों के अनुसार विषयों का क्रम भिन्न हो सकता है, किन्तु मुख्य रूप से निम्न विषयों का अध्ययन कराया जाता है—
- मुहूर्त शास्त्र का परिचय
- तिथि विचार
- वार विचार
- नक्षत्र विचार
- योग एवं करण
- लग्न विचार
- ग्रहबल एवं ग्रह स्थिति
- विवाह मुहूर्त
- गृह प्रवेश
- गृह निर्माण एवं भूमि पूजन
- देव प्रतिष्ठा
- नामकरण संस्कार
- अन्नप्राशन
- उपनयन
- यात्रा मुहूर्त
- व्यापार प्रारम्भ
- कृषि सम्बन्धी मुहूर्त
- विविध शुभाशुभ योग
- दोष एवं उनके परिहार
यह पुस्तक किनके लिए उपयुक्त है?
यह पुस्तक विशेष रूप से—
- वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थी
- ज्योतिषाचार्य
- कर्मकाण्ड विशेषज्ञ
- पुरोहित
- शोधार्थी
- पंचांग अध्ययन करने वाले
- धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले विद्वान
- मुहूर्त विज्ञान में रुचि रखने वाले पाठक
के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।
लेखक (व्याख्याकार) परिचय
डॉ. सुरेश चन्द्र मिश्र वैदिक ज्योतिष एवं संस्कृत ग्रंथों के प्रतिष्ठित व्याख्याकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने अनेक शास्त्रीय ज्योतिष ग्रंथों का हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या प्रस्तुत की है, जिससे पारंपरिक संस्कृत ग्रंथ सामान्य हिन्दी पाठकों और विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ बने हैं। उनके द्वारा संपादित एवं व्याख्यायित ग्रंथ ज्योतिष शिक्षण संस्थानों एवं शोधकर्ताओं द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

















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