‘मुहूर्त विचार’ वैदिक ज्योतिष की मुहूर्त शाखा पर आधारित एक उपयोगी एवं व्यवहारिक पुस्तक है। भारतीय संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य—जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, यात्रा, प्रतिष्ठा, व्यवसाय आरम्भ अथवा धार्मिक अनुष्ठान—के लिए उचित समय (मुहूर्त) का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यही विषय इस पुस्तक का मुख्य आधार है।
इस पुस्तक के लेखक आचार्य मदन मोहन जोशी ने कठिन शास्त्रीय सिद्धांतों को अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है ताकि सीमित ज्योतिष ज्ञान रखने वाला पाठक भी मुहूर्त शास्त्र की मूल अवधारणाओं को समझ सके। लेखक ने स्वयं उल्लेख किया है कि पुस्तक की रचना में मुहूर्त चिन्तामणि, मुहूर्त पारिजात, शीघ्र बोध, बालबोध आदि प्रतिष्ठित ग्रंथों का अध्ययन एवं संदर्भ लिया गया है।
पुस्तक का महत्व
मुहूर्त शास्त्र वैदिक ज्योतिष की वह शाखा है जो किसी कार्य के शुभारम्भ के लिए उपयुक्त समय का निर्धारण करती है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, लग्न तथा ग्रहों की स्थिति के समन्वित अध्ययन से शुभ एवं अशुभ समय का चयन किया जाता है।
‘मुहूर्त विचार’ इस विषय को अत्यंत सरल एवं व्यावहारिक शैली में प्रस्तुत करती है। पुस्तक में केवल सिद्धांत ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न शुभ कार्यों के लिए व्यवहारिक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे यह पुस्तक विद्यार्थियों एवं सामान्य पाठकों दोनों के लिए उपयोगी बन जाती है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
- सरल एवं सहज हिन्दी भाषा में प्रस्तुति।
- मुहूर्त शास्त्र की आधारभूत अवधारणाओं का स्पष्ट वर्णन।
- मुहूर्त चिन्तामणि एवं मुहूर्त पारिजात जैसे पारंपरिक ग्रंथों पर आधारित सामग्री।
- नक्षत्र, योग, तिथि एवं वार का व्यावहारिक अध्ययन।
- विवाह एवं शुभ संस्कारों के मुहूर्त का विवेचन।
- यात्रा एवं वास्तु संबंधी मुहूर्त विचार।
- राहुकाल एवं चौघड़िया की उपयोगी जानकारी।
- मेलापक एवं कुण्डली मिलान का संक्षिप्त परिचय।
- तालिकाओं सहित सरल अध्ययन सामग्री।
- ज्योतिष के प्रारम्भिक विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी।
पुस्तक में सम्मिलित प्रमुख विषय
उपलब्ध विषय-सूची के अनुसार पुस्तक में निम्नलिखित विषयों का अध्ययन किया गया है—
- मुहूर्त का परिचय
- नक्षत्रों के भेद एवं कार्य
- नाड़ी एवं कर्म विचार
- योग विचार
- युग, ऋतु एवं मास
- मुहूर्त निर्धारण के नियम
- वास्तु विचार
- यात्रा विचार
- विविध शुभ मुहूर्त
- गण्डान्त
- नक्षत्रों की अन्धादि संज्ञाएँ
- राहुकाल
- विवाह में तेल चढ़ाने की परंपरा
- लग्नों की अन्धादि संज्ञाएँ
- केन्द्रस्थ गुरु का फल
- मेलापक
- कुण्डली मिलान
- उपयोगी ज्योतिषीय तालिकाएँ
- विषकन्या योग
- चौघड़िया मुहूर्त
- विवाह संबंधी दोष
- कुण्डली मिलान में विशेष सावधानियाँ
लेखक परिचय
आचार्य मदन मोहन जोशी वैदिक ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड के प्रतिष्ठित अध्येता एवं शिक्षक हैं। उन्होंने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से अध्ययन किया तथा भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद (ICAS) में मुहूर्त एवं मेलापक विषय का अध्यापन भी किया। उनका उद्देश्य शास्त्रीय ज्योतिष को सरल भाषा में सामान्य पाठकों तक पहुँचाना रहा है। ‘मुहूर्त विचार’ इसी उद्देश्य से लिखी गई उनकी व्यावहारिक कृति है।
यह पुस्तक किन पाठकों के लिए उपयुक्त है?
यह पुस्तक विशेष रूप से—
- मुहूर्त शास्त्र के प्रारम्भिक विद्यार्थी
- वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थी
- कर्मकाण्ड एवं धार्मिक अनुष्ठानों के अध्ययनकर्ता
- विवाह एवं संस्कार मुहूर्त जानने के इच्छुक पाठक
- पंचांग अध्ययन में रुचि रखने वाले व्यक्ति
- ज्योतिष शिक्षक एवं शोधार्थी
- धार्मिक एवं आध्यात्मिक साहित्य के पाठक
के लिए उपयोगी है।
इस पुस्तक को क्यों पढ़ें?
यदि आप मुहूर्त शास्त्र की जटिल अवधारणाओं को सरल भाषा में समझना चाहते हैं और विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा, वास्तु अथवा अन्य शुभ कार्यों के लिए पारंपरिक नियमों के अनुसार मुहूर्त चयन की आधारभूत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो ‘मुहूर्त विचार’ एक उत्कृष्ट प्रारम्भिक अध्ययन पुस्तक है। संक्षिप्त आकार होने के बावजूद इसमें व्यवहारिक उपयोग की अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत की गई हैं।
















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