पंचांग पूजन पद्धति वैदिक एवं सनातन परम्परा में प्रचलित पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों से जुड़े आवश्यक कर्मकाण्डों की विधि समझने के लिए एक उपयोगी धार्मिक ग्रन्थ है। गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में संस्कृत मन्त्रों के साथ हिन्दी में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं, जिससे पाठकों को विभिन्न पूजन-विधियों के क्रम और प्रयोग को समझने में सहायता मिलती है।
इस ग्रन्थ में पंचांग पूजन के प्रमुख कर्मों की विधि प्रस्तुत की गई है। इनमें कलशस्थापन, पुण्याहवाचन, रक्षाविधान एवं आयुष्यमन्त्रपाठ, नवग्रह पूजन तथा नान्दीमुख श्राद्ध जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त स्वस्तिवाचन, शान्तिपाठ, गणेश-अम्बिका पूजन, षोडशमातृका पूजन, सप्तघृतमातृका पूजन और ब्राह्मणवरण जैसे विषय भी इसमें शामिल हैं।
पुस्तक में नवग्रह मण्डल पूजन तथा सूर्य आदि नवग्रहों से संबंधित पूजन-विधान का वर्णन मिलता है। वैदिक मन्त्रों के साथ पौराणिक मन्त्रों का समावेश इसे कर्मकाण्ड के अध्ययन और पारम्परिक पूजा-पद्धतियों को समझने वाले पाठकों के लिए उपयोगी बनाता है।
परिशिष्ट में कुशकण्डिका सहित होमविधि जैसी सामग्री भी दी गई है। विभिन्न कर्मों को समझने में सहायता के लिए पुस्तक में आवश्यक रेखाचित्र भी शामिल हैं।
मुख्य विषय:
- पंचांग पूजन की प्रयोग-विधि
- स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
- गणेश-अम्बिका पूजन
- कलशस्थापन एवं पुण्याहवाचन
- षोडशमातृका एवं सप्तघृतमातृका पूजन
- रक्षाविधान एवं आयुष्यमन्त्रपाठ
- नवग्रह मण्डल पूजन
- नान्दीमुख श्राद्ध एवं ब्राह्मणवरण
- वैदिक तथा पौराणिक मन्त्र
- कुशकण्डिका सहित होमविधि
यह पुस्तक कर्मकाण्ड के विद्यार्थियों, पुरोहितों, आचार्यों तथा वैदिक पूजा-पद्धति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रन्थ हो सकती है। मांगलिक कार्यों और पारम्परिक संस्कारों से जुड़े पूजन-विधानों का अध्ययन करने के लिए इसे अपने धार्मिक पुस्तक-संग्रह में शामिल किया जा सकता है।





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