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Prem Darshan by Hanuman Prasad Poddar | Vrindavan Rasik Vani | Gita Press Gorakhpur | Code 341

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“Prem Darshan” श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (गीता प्रेस, गोरखपुर) द्वारा लिखित एक अनुपम ग्रंथ है, जो भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक जीवन की गहन व्याख्या करता है। इसमें वृंदावन रसिक वाणी के माध्यम से प्रेम तत्त्व का दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व प्रस्तुत किया गया है।

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Prem Darshan (Code 341), गीता प्रेस गोरखपुर का एक विशेष आध्यात्मिक ग्रंथ है, जिसे श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी) ने रचा है।

यह पुस्तक वृंदावन रसिक परंपरा और भक्ति भाव पर आधारित है। इसमें समझाया गया है कि ईश्वर से जुड़ने का सर्वोच्च मार्ग निष्काम प्रेम और समर्पण है। ग्रंथ में भक्त और भगवान के बीच अनन्य प्रेम संबंध को गहराई से स्पष्ट किया गया है।

मुख्य विषय-वस्तु:

  • प्रेम और भक्ति का दार्शनिक विश्लेषण

  • श्रीकृष्ण एवं राधा के प्रेम का आध्यात्मिक महत्व

  • साधक के जीवन में भक्ति और प्रेम का स्थान

  • वृंदावन रसिक संतों की अमृत वाणी

यह पुस्तक भक्तिरस और वैष्णव परंपरा से जुड़े साधकों एवं अध्येताओं के लिए विशेष उपयोगी है।


📌 Key Features (मुख्य विशेषताएँ)

  • श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी) की अमूल्य कृति

  • प्रेम और भक्ति के गूढ़ रहस्यों का विवेचन

  • वृंदावन रसिक संतों की वाणी पर आधारित

  • गीता प्रेस गोरखपुर का प्रामाणिक प्रकाशन

  • अध्यात्म और साधना मार्ग के लिए अत्यंत प्रेरणादायक


📌 Best For (उपयुक्त पाठक वर्ग)

  • श्रीकृष्ण भक्त और साधक

  • वैष्णव परंपरा का अध्ययन करने वाले

  • आध्यात्मिक साधना पथ पर अग्रसर व्यक्ति

  • प्रेम, भक्ति और रसिक साहित्य में रुचि रखने वाले

  • गीता प्रेस संग्रहकर्ताओं और विद्वानों के लिए

Weight 250 g
Dimensions 22 × 14 × 2 cm
Binding

Paperback

Language

Hindi

Publication

Gita Press (Gorakhpur)

Author

Shri Hanuman Prasad Poddar

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