“रुद्राष्टाध्यायी संवाद सहित” वेदों के शुक्ल यजुर्वेद से संकलित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र-संग्रह है, जो भगवान शिव की उपासना और स्तुति का अत्यंत प्रभावी साधन माना जाता है। इसमें आठ अध्यायों के रूप में शिव के रुद्रस्वरूप की स्तुति है।
गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस संस्करण में संस्कृत मूलपाठ के साथ सरल और स्पष्ट हिंदी अनुवाद दिया गया है, जिससे पाठक इसका अर्थ सहजता से समझ सकते हैं। यह पुस्तक पूजा-पाठ, अनुष्ठान और पारायण के समय विशेष रूप से उपयोगी है और साधकों को आत्मिक शांति एवं शक्ति प्रदान करती है।
📌 Key Features (मुख्य विशेषताएँ)
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संस्कृत मूलपाठ एवं स्पष्ट हिंदी अनुवाद
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भगवान शिव के रुद्रस्वरूप की स्तुति के 8 अध्याय
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वेदों पर आधारित प्रामाणिक स्तोत्र संग्रह
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गीता प्रेस, गोरखपुर का आधिकारिक प्रकाशन
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अनुष्ठान, जप एवं पारायण हेतु उपयुक्त
📌 Best For (उपयुक्त पाठक वर्ग)
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शिवभक्त और साधक
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वैदिक मंत्रों और स्तोत्रों के अध्ययनकर्ता
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पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग हेतु
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संस्कृत और हिंदी धर्मग्रंथों के विद्यार्थी
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घर और मंदिर में पाठ के लिए उपयुक्त
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