“योगी प्रारब्ध एवं कालचक्र” (लेखक: के. एन. राव, प्रकाशक: वाणी पब्लिकेशन) एक अद्वितीय ग्रंथ है जो ज्योतिष के गहन सिद्धांतों — प्रारब्ध, योग और कालचक्र — को स्पष्ट और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाता है।
इस पुस्तक में लेखक ने दिखाया है कि कैसे एक योगी का जीवन प्रारब्ध (पूर्व जन्म के कर्म) और कालचक्र (समय का चक्र) से प्रभावित होता है, और किस प्रकार इनका ज्योतिषीय विश्लेषण किया जा सकता है।
पुस्तक में जन्मपत्रिका के अध्ययन, ग्रह-गोचर के प्रभाव, दशा प्रणाली, और समय-निर्धारण की सूक्ष्म पद्धतियों का विस्तृत वर्णन है।
यह पुस्तक न केवल ज्योतिष के विद्यार्थियों के लिए, बल्कि गहन आध्यात्मिकता और कर्म के सिद्धांत को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए भी अनुपम है।
Key Features (in Hindi)
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प्रारब्ध, योग और कालचक्र का गहन ज्योतिषीय विश्लेषण
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के. एन. राव के शोध एवं अनुभव पर आधारित
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व्यावहारिक उदाहरणों से सुसज्जित
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वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थियों और विशेषज्ञों दोनों के लिए उपयोगी
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सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुति
Best For (in Hindi)
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वैदिक ज्योतिष के विद्यार्थी
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शोधकर्ता और अध्यापक
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योग और कर्म सिद्धांत में रुचि रखने वाले
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आध्यात्मिक एवं धार्मिक अध्ययन करने वाले पाठक
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